अवैध निर्माण होता रहा : आजमगढ़ वि. प्राधिकरण सोता रहा

कलेक्टर की पत्नी है ए डी ए  की सचिव 

आजमगढ़
जी हाँ यह राहुल, शिब्ली और हरिऔध का नगर है। अब मुलायम और उनके मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश और उनकी सरकार की प्राथमिकताओं का शहर है। दुर्गा, रमाकान्त और बलराम का शहर। यह अखिलेश कबीना के दर्जन भर मंत्रियों और सपा विधायकों का शहर है। यह नये जिलाधिकारी द्वारा चौराहों और चौड़े राहों से बदले गये कलेवर और बाहरी रंग रोगन का शहर है। यह जाग्रत मानस का शहर है। फिर यह मुर्दों का शहर कैसे बनता जा रहा है। जिन्दादिली और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाले शहर और इसके निवासियों को क्या आजमगढ़ विकास प्राधिकरण यानी एडीए लल्लू समझता है। क्या एडीए नगरवासियों को मानसिक विकलांग समझता है

यह पब्लिक है सब कुछ जानती है। यह जानती है कि आप एडीए की सचिव, डीडीसी और उससे भी बढ़कर कलेक्टर की ताकतवर पत्नी हैं और पति प्राधिकरण का उपाध्यक्ष। फिर जिस भवन या जिस लोटस हास्पिटल का नक्शा आप दो मंजिले की पास करती हैं वह 6 मंजिलों का निर्माण कैसे कर लेता है। क्या यह अवैध निर्माण एक या दो सप्ताह में हो जाता है या रात के अंधेरे में हो जाता है। या निर्माणकर्ता के हाथों अलादीन का चिराग लग जाता है जो पलक झपकते ही 6 मंजिली हास्पिटल की इमारत तैयार कर लेता और एडीए सचिव को तब मालूम चलता है जब इस आलीशान अस्पताल का उद्घाटन समारोह का आयोजन होता है।

हद दर्जे का नकारापन तो देखिये कि लाखों रुपए पगार उठाने वाला एडीए का स्टाफ किस कुम्भकर्णी निद्रा में सो रहा था। क्या ऐसे भवन निर्माणकर्ता के जेहन में कानून का भय और प्राधिकरण का नियम ठेंगें पर नहीं है। पुलिस प्रशासन और व्यवस्था की छाती पर तांडव करतें इस अवैध निर्माण की बुनियाद में कौन नहीं जानता कि व्यवस्था का आदमी है। कौन नहीं जानता कि इस निर्माण में उस डाक्टर पंकज राय का हाथ है जो आप की ही व्यवस्था के अन्तर्गत चक्रपानपुर पी जी आई अस्पताल में चिकित्सक हैं। कौन नहीं जानता है कि यह इमारत रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजालों में सरेआम महीनों तक बनती रही है।
कौन नहीं जानता कि यह इमारत शहर से दूर एकान्त में नहीं बल्कि शहर की आबादी के बीचोबीच व्यस्तता भरी उस ठंडी सडक पर बनी है जिस पर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसर अपनी वातानुकूलित गाड़ियों में बैठकर शारदा चौराहा होते हुए कलेक्टरेट पहुंचते हैं। कौन नहीं जानता कि हास्पिटल के उद्घाटन के बाद एडीए के जारी नोटिस का मतलब सांप जाने के बाद लकीर पीटने के बराबर है। क्या एडीए की सचिव और कलेक्टर की ताकतवर पत्नी के पास वह साहस अब नहीं रहा है जो उन्होंने अन्य इमारतों के ध्वस्तिकरण में दिखाया है। या फिर नोटिस के बाद यह अवैध निर्माण वैध हो जायेगा। एडीए के कानून की धज्जियां यहीं नहीं उडायी जाती बल्कि एक दूसरे डा० पंकज जायसवाल जो सरकारी व्यवस्था के अंग होते हुए भी शारदा चौराहा से सिधारी पुल के पास नदी किनारे ग्रीन लैंड में आवास का नक्शा पास कराते हैं और हास्पिटल का निर्माण करवाने लगतें हैं। यह भी उसी पी जी आई में चिकित्सक हैं जहाँ पंकज राय हैं। ये दोनों अवैध निर्माण कार्यों को अंजाम देने वाले कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं बल्कि इस धरती के भगवान हैं। और ये कलयुगी भगवान जिस मन्दिर के निर्माण में लगे हैं उसकी संग-ए-बुनियाद ही भ्रष्टाचार और कदाचार की ईट पर खड़ी हो रही है। और एडीए जांच और नोटिस की गठरी बना कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करने में लगा है जबकि अवैध निर्माण के संचालक सब कुछ मैनेज करने में लगें हैं।
                                                                                                                                                    (लेखक शार्प रिपोर्टर का संपादक है)
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