मुख्यमंत्री जी! करोड़ों की ‘भाषा निधि’ कहां गयी ?

-ः मुख्यमंत्री के विभाग में उदासीनता: इस धनराशि के बारे में न तो प्रमुख सचिव-भाषा ने कुछ बताने की ज़हमत उठाई और नहीं उनका भाषा विभाग। मुख्यमंत्री के इस विभाग ने इस ‘फंड’ का क्या किया। इसकी जानकारी क्या मुख्यमंत्री को है, यह सवाल अखिलेशराज में भी निरूत्तर था और आज योगीराज में भी है? […]

तो मेरे जिले का कलेक्टर सेवाभाव को इतना सीमित आंकता है ?

(व्यंग्य) संदर्भ: #पद्मश्री आलोचना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है अरविंद सिंह ◆रामखेलावन को जयसिंह यादव के नाम को पद्मश्री के लिए नामित होने से बहुत तकलीफ है। वह बेचारा इस असहनीय पीड़ा से बेजार कभी सरकार को तो, कभी कलेक्टर साहेब को कोसता है और कभी अपनी फूटी किस्मत पर रोने लगता है। कभी बला की […]

हादसा या बालसंहार ?

यह एक हृदयस्पर्शी कविता भर नहीं है, और नहीं सबसे नौजवान देश के मासूम बचपन की टूट चुकी सांसों की डोर पर गायी गयी मर्सिया है। और नहीं हमारी सभ्यता की मौत पर पढ़ी गयी राजसत्ता ही फातिहा। बल्कि यह हमारे समय की निर्लज्जता, राजसत्ता और समाज की सुख चुकी संवेदना, और उसकी (अ)विकसित सभ्यता […]

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की बात करना मेरी नासमझी थी, आज शर्म आती है : राम जेठमलानी

पत्र में पीएम मोदी को संबोधित करते हुए जेठमलानी लिखते हैं, ‘आपके तीन साल के काम को लेकर मेरी निराशा को आप नहीं समझ सकते. एक दोस्त के रूप में मैं एक दुर्भाग्यपूर्ण देश के ऐसे अयोग्य नेता को उसकी असफलता के सबूत देता रहा जिसके हाथों में देश का भाग्य है. देश के सबसे […]

जहर मिलता रहा..जहर पीते रहे……. बंदिशों में बेखौफ होने का मजा

याद नहीं आता इंदिरा गांधी के इमरजेन्सी के दौर को छोडकर कभी कोई प्रधानमंत्री बहस – चर्चा में आया । जेएनयू में रहते हुये मुनिस रजा तो शैक्सपियर और किट्स के जरीये क्लासिकल अंग्रेजी साहित्य को छात्रों के साथ शाम में घूमते-टहलते हुये बकायदा जीते । छात्र भी जीते । आगवानी साहेब तो जेएनयू की […]

यह प्रधानमंत्री की स्वेच्छाचारिता और निरंकुशता की पराकाष्ठा है…

नोटबंदी भारत के प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार को भगाने के नाम पर, काला धन को लाने के नाम पर, नकली नोटों को मुद्रित होने से रोकने के नाम पर, कागजी करेन्सी की बन्दी और बदली का जो काम किया है, उसको अर्थशास्त्र की दृष्टि से मूर्खतापूर्ण कहा जायेगा, राजनीति की दृष्टि से मक्कारी से परिपूर्ण कहा […]

एक घातक निर्णय का हासिल क्या है ?

नोटबंदी और जीएसटी की असलियत इन खबरों ने देशवासियों को व्यग्र कर दिया है कि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर को गहरा झटका लगा है, और नोटबंदी की धोषणा के बाद चलन से बाहर की गई करीब-करीब समूची करंसी वापस बैंकों के पास लौट आई है। तो […]

स्वतंत्रता पुकारती/अमन कुमार

‘‘आज पंद्रह अगस्त है। पंद्रह अगस्त के महत्व को कोई भारतीय भला कैसे भूल सकता है। इस दिन हमारा पुनर्जन्म हुआ था। दासता की बेड़ियाँ कट गई थीं। अब तक हमारी स्वतंत्रता के लिए न जाने कितने ही वीर सपूत बलिवेदी पर हँसते हँसते चढ़ गए थे। हमारी गुलामी की बहुत छोटी वजह थी और […]

‘टॉयलेट ..एक प्रेम कथा’ पहली ही फिल्म में ‘बखेड़ा’

अमित राजपूत नॉर्थ-ईस्ट की शान्ति में भारतीय सेना के वर्ड ऑफ कमाण्ड और जवानों के बूटों की थाप के सिवा एक आर्मी कैण्टोनमेण्ट में समाज के तमाम रंगों से दूर की परवरिश से निकले विक्की प्रसाद आज अपनी उंगलियों से संगीत के तमाम रंगों को बिखेरने के हुनरबाज हो गये हैं। वे आज बॉलीवुड के […]

मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेहर के साथ !

तीन तलाक पर सुप्रीमकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला ‘‘तलाक दे तो रहे हो गुरूर-ओ-कहर के साथ मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेहर के साथ’’ प्रेमपाल सिंह ‘वाल्यान’ सजनी भोपाली ने यह शेर तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की मानसिक त्रासदी के किन हालात बयानी को लिखा होगा इसका आज, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। […]

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