गुजरात में भाषा के स्तर पर प्रधानमंत्री तक नीचे गिरे/अरविंद सिंह

◆ ”शर्मनाक पराजय तो सुना था लेकिन शर्मनाक विजय नहीं सुना था। गुजराती चुनाव परिणामों के बारे में आजकल यह मुहावरा पूरे समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। आखिर इसके निहितार्थ क्या हैं।क्या जीत भी कभी शर्मनाक हो सकती है। क्या हार भी कभी जीत के एहसास जितना आनंदित करती है।क्या विकास […]

मील का पत्थर साबित होगी विशेष अदालतें

देश में भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह है यह दागी नेता और उनके भ्रष्टाचारी तौर-तरीके। इस बीमारी से तभी मुक्त हुआ जा सकता है जब आरोपी राजनेता के खिलाफ चल रहे मुकदमे जल्द से जल्द अपने मुकाम पर पहुंचें और दोषी पाए जाने पर उसे जीवनभर चुनाव न लड़ने दिया जाए और सख्त सजा का […]

आकांक्षा यादव मानसश्री सम्मान से सम्मानित

–सुदर्शन सामरिया हिंदी साहित्य और लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए युवा साहित्यकार व ब्लॉगर सुश्री आकांक्षा यादव को मौन तीर्थ सेवार्थ फाउण्डेशन, उज्जैन द्वारा “मानसश्री सम्मान -2017” से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मानस्वरुप स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, शाल और पाँच हजार एक सौ रूपये की राशि दी गई। सामाजिक और साहित्यिक विषयों […]

तो कांग्रेस की हार के निहितार्थ भाजपा के जीत से बड़े हैं ?

मोदी ब्रांड को इस बात के लिए हमेशा जाना जायेगा कि उसने इस चुनाव (2017)में राहुल गांधी को एक परिपक्व नेता के सांचे में ढाल दिया। इस चुनाव ने राहुल को पप्पू की छवि से बाहर निकाल एक राजनेता के रूप में स्थापित कर दिया। इस चुनाव ने कांग्रेस के अंदर यह विश्वास भर दिया […]

महिलाएँ छेड़छाड़ का शिकार क्यों बनती हैं ?

लड़कियों के प्रति लड़कों का व्यवहार यौन आकर्षण से निर्धारित होता है। इसलिए युवाओं को यौन शिक्षा आवश्यक है। साथ ही युवतियों को अपना आत्मबल बनाये रखना चाहिए। उन्हें अपनी रक्षा हेतु जूड़ो कराटे का प्रशिक्षण लेना चाहिए तथा साहस और बुद्धि का प्रयोग कर अपनी रक्षा करनी चाहिए। -डाॅ. प्रेमपाल सिंह बालियान स्त्रियों से […]

बिसराम के बिरहे और भाष्यकार मुखराम की लोकदृष्टि

बिरह और वीरता भोजपुर के निवासियों के अभिन्न अंग हैं। शताब्दियों से इस अँचल की वीरप्रसू धरित्री अपने क्रोड़ में वीरता और विपन्नताओं को छिपाए हुए सिसक रही है। वीरता और प्रेम का अन्योन्याश्रम संबंध होता है। वीर अपने अवकाश के क्षणों में प्रेम की शीतल छाया में विश्राम करता है। प्रेमाश्रुओं का पानी तलवार […]

मुखराम सिंह होने का मतलब जीवटता और जिजीविषा का मिलन

पचास के दशक में जन सरोकारों को लेकर जिस एक जुझारु और मिशनरी पत्रकार ने आजमगढ़ के वायुमंडल में सिंह गर्जना की, और उसके लिए लेखनी को हथियार बना, कागज के कुरुक्षेत्र में उतरा गया, उस दिलेर और जांबाज कलम के सिपाही का नाम मुखराम सिंह ही था। वो मुखराम, जिसकी भाषा में अविरल गंगा […]

तीस्ता की गोद और बौद्ध के पालने में जवां होता प्रकृति का अनिंद्य सौन्दर्य ‘गंगटोक’

यह मंगोलियन, चीनी, बांग्ला, पहाडी, नेपाली, हिंदू मिश्रित संस्कृतियों का अद्भुत और अकल्पनीय भारतीय प्रदेश है। तिब्बत के पठारों से निकलती तीस्ता सिक्किम के लिए जीवनरेखा है। इसकी घाटी में पहाडी जीवन पैदा और जवां होता है। इस लिए तीस्ता यहा के जनमानस के लिए केवल एक नदी भर नहीं है, बल्कि उनके जीवन की […]

तो कांग्रेस की ओवरहालिंग का सबसे मुफीद समय है राहुल युग ?

कांग्रेस: गांधी से गांधी तक वह पीढ़ी आज भी कांग्रेसी कल्चर में ही सोचती और जीती है। हाँलाकि इस कालखंड में गंगा, यमुना, सतलज, झेलम, साबरमती और ब्रह्मपुत्र में ना जाने कितनी जलराशि बह गयी। उस दौर में पैदा हुए बच्चे आज बुढ़ापे के दिन गिन रहे हैं। देश को सात प्रधानमंत्री देने वाली पार्टी, […]

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