मुखराम सिंह होने का मतलब जीवटता और जिजीविषा का मिलन

पचास के दशक में जन सरोकारों को लेकर जिस एक जुझारु और मिशनरी पत्रकार ने आजमगढ़ के वायुमंडल में सिंह गर्जना की, और उसके लिए लेखनी को हथियार बना, कागज के कुरुक्षेत्र में उतरा गया, उस दिलेर और जांबाज कलम के सिपाही का नाम मुखराम सिंह ही था। वो मुखराम, जिसकी भाषा में अविरल गंगा […]

तीस्ता की गोद और बौद्ध के पालने में जवां होता प्रकृति का अनिंद्य सौन्दर्य ‘गंगटोक’

यह मंगोलियन, चीनी, बांग्ला, पहाडी, नेपाली, हिंदू मिश्रित संस्कृतियों का अद्भुत और अकल्पनीय भारतीय प्रदेश है। तिब्बत के पठारों से निकलती तीस्ता सिक्किम के लिए जीवनरेखा है। इसकी घाटी में पहाडी जीवन पैदा और जवां होता है। इस लिए तीस्ता यहा के जनमानस के लिए केवल एक नदी भर नहीं है, बल्कि उनके जीवन की […]

तो कांग्रेस की ओवरहालिंग का सबसे मुफीद समय है राहुल युग ?

कांग्रेस: गांधी से गांधी तक वह पीढ़ी आज भी कांग्रेसी कल्चर में ही सोचती और जीती है। हाँलाकि इस कालखंड में गंगा, यमुना, सतलज, झेलम, साबरमती और ब्रह्मपुत्र में ना जाने कितनी जलराशि बह गयी। उस दौर में पैदा हुए बच्चे आज बुढ़ापे के दिन गिन रहे हैं। देश को सात प्रधानमंत्री देने वाली पार्टी, […]

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