गुजरात में भाषा के स्तर पर प्रधानमंत्री तक नीचे गिरे/अरविंद सिंह

◆ ”शर्मनाक पराजय तो सुना था लेकिन शर्मनाक विजय नहीं सुना था। गुजराती चुनाव परिणामों के बारे में आजकल यह मुहावरा पूरे समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। आखिर इसके निहितार्थ क्या हैं।क्या जीत भी कभी शर्मनाक हो सकती है। क्या हार भी कभी जीत के एहसास जितना आनंदित करती है।क्या विकास […]

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