जालबपुर गूदड़ अब पुराना गाँव नहीं लगता

जनपद बिजनौर की तहसील नजीबाबाद में स्थित गाँव जालबपुर गूदड़ आब आधुनिक होता जा रहा है। विगत योजना तक यह गाँव विकास से कोसो दूर था। सड़कें, नाली सब कच्ची और कीचड़ भरी होती थीं। यही नहीं गाँव की महिलाएं और पुरुष प्रायः खुले में ही शौच के लिए जाते थे मगर आज ऐसा नहीं है। आज गाँव में विकास दिखाई दे रहा है और खुले में शौच के लिए भी अब कोई नहीं जाता है। यह करिश्मा कर दिखाया है ग्राम प्रधान नंदिनी राजपूत ने। नंदिनी राजपूत बेहद सुशिक्षित, व्‍यवहारकुशल, मृृृृदुभाषी, दूरदर्शी, ईमानदार और तरक्कीपसंद महिला हैं। उन्होंने दृढसंकल्‍प के साथ सजग रहते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ गाँव के विकास के लिए लिया और विकास कार्य कराए। प्रस्तुत है ग्राम प्रधान नंदिनी राजपूत से की गई बातचीत के मुख्य अंश-

प्रधान जी आप अपने गाँव को किस प्रकार देखती हैं? और आपको आपके परिवार का कितना सहयोग मिलता है?
मेरा गाँव मेरा परिवार है व पंचायत का प्रत्‍येक निवासी मेरे परिवार का सदस्‍य है और मैं अपने परिवार की मुख्‍य सेविका हूं। गाँव का समग्र विकास मेरा नैतिक औरा सामाजिक कर्तव्य है जिसे पूरा करने का मैं प्रयास कर रही हूं और करती रहूंगी। रही बात परिवार के सहयोग की तो मेरे पति हिमांशु राजपूत जो कि काफी समय से समाजसेवा और राजनीति से जुडे हैं, उनका भरपूर सहयोग उनके अनुभव के रूप में सदैव मेरे साथ रहता है। साथ ही परिवार के समस्‍त छोटे-बडे सदस्‍य सभी मुझे यथायोग्य सहयोग करते हैं। परिवार के बिना मेरे लिए यह सब संभव ही नहीं था।

आपके गाँव में कौन-कौन सा क्षेत्र है?
ग्राम पंचायत जालबपुर गूदड़ में सुभाष नगर, खिदरीपुरा, आरसी पुरम, जयनगर, शिवलोकपुरम, साईं नगर, लक्ष्‍मी नगर, संतोष विहार, आरफपुर खजूरी और खुशहालपुर मड़का आबादियां हैं। आप सभी आबादियों को देख लीजिए सभी में आवश्यकतानुसार विकास कार्य कराए गए हैं और कराए जा रहे हैं।


ग्राम प्रधान द्वारा लगवाई गई सोलर लाईट, शौचालय और सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी को भेंट
करते हुए प्रधानपति हिमांशु राजपूत

कुछ विकास कार्यों के बारे में बताएंगी?
जी बिल्कुल, हमने सरकारी निधि से प्राथमिक विद्वालय में मिट्टी भराव कराकर बरसात के पानी भराव से मुक्ति पाई है और उनकी चारदिवारी तथा मुख्य द्वार लगवाकर, आरसीसी रोड तथा विद्युतिकरण करवाकर विद्वालय को विद्वालय की तरह बनाया है ताकि अध्यापकों और छात्रों का मन पठन-पाठन में लगे। आंगनबाडी केंद्र भी बनवाया है। गांव में अधिकतर सड़कें आरसीसी की बनवा दी गई हैं, शुद्ध पानी के लिए सबमर्सिबल पंप लगवाया गया है। किसानों के लिए सिंचाई के साधन के रूप में ट्यूबवेल हेतु सरकारी निशुल्क बोर कराए गए हैं।

शौचालय और आवास योजना और उज्ज्वला के बारे में भी बताइए?
हमने अपने गाँव में 178 शौचालयों का निर्माण कराया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चयनित आवासाों की सूची सरकार को भिजवा दी गई है और पात्रों को उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन भी दिलवाए गए हैं। यही नहीं हमने एक बड़ा काम अपनी पूरी पंचायत का लगभग 200 पोल की लाईन बनवाकर पूर्णरूप से विद्युतिकरण कराया गया है। पथ प्रकाश के लिए सौर लाईटें भी हमने अपनी पंचायत में लगवाई हैं।

आप मनरेगा के अंतर्गत भी कार्य कराती हैं?
हां जी, मनरेगा के अंतर्गत कच्चे काम ही अधिक होते हैं। जिसके तहत 27 चकरोड और 7 पुलिया बनवा दी गई हैं। मिट्टी भराव का कार्य कराया गया है। तालाब तथा सरकारी जमीनों की खाईबंदी व शौचालयों में मनरेगा का लाभ लिया जा रहा है और जहां भी आवश्यक है नियमानुसार मनरेगा से कार्य चल रहे हैं।

स्वच्छता के लिए क्या कार्य किए जा रहे हैं?
स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सफाई कर्मचारी तो सफाई करते ही हैं हमारे गाँव के लोग भी अपनी अपनी सफाई पर विशेष ध्यान देकर सफाई अभियान को बल दे रहे हैं। यही नहीं हमारे गाँव में सरकारी भूमि पर ठोस, द्रव्य, अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कूड़ा निस्तारण संयत्र की स्थापना कराई जा रही है जिससे गाँव की महिलाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे और कूडे का निस्‍तारण भी हो सकेगा।

महिला सशक्तिकरण के लिए कुछ किया?
महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया है। उन्हें सिलाई करना सिखाया गया है। उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। महिलाओं को आत्‍मनर्भिर बनाने के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। वैसे भी हमारे गाँव में प्रत्येक व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करता है। यहां सभी महिलाएं और बेटियां सुरक्षित रहकर मेहनत करती हैं। अब हमारे गाँव की लड़कियों के पास आजीविका के लिए एक अतिरिक्त हूनर भी है।

जिसे आप विशेष कह सकें ऐसा कोई कार्य बताइए?
विशेष तो सभी होते हैं क्योंकि हर कार्य मन से कराया जा सकता है मगर फिर भी कहना चाहूंगी कि सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराना हमारे लिए चुनौतिपूर्ण रहा है। पर हमने भारी सफलता प्राप्‍त करते हुए 20 से अधिक अवैध कब्जे सरकारी भूमियों से हटवाए हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करवाई है। इसके अलावा हमने अपनी ओर से एक विशेष योजना ग्राम प्रधान कन्यादान योजना 5 मई 2017 को प्रारंभ की है। इस योजना के तहत हम अपनी ग्राम पंचायत में होने वाली प्रत्येक कन्या के विवाह में एक सिलाई मशीन भेंट करते हैं। इसमें कोई भी सरकारी मदद नहीं होती है। हमने सिलाई प्रशिक्षण भी अपने गाँव की लड़कियों को निशुल्क दिलवाया है तथा हमने अपने दोनों प्राथमिक विद्यालयों में निजि खर्च पर छात्रों के लिए फर्निचर उपलब्‍ध कराया है। अब हमारे बच्‍चे किसी कान्‍वेंट स्‍कूल की तरह ही कक्षा में बैठते हैं।


ग्राम प्रधान द्वारा कब्जामुक्त कराई गई भूमि, वृक्षारोपण करते हुए और
कन्याओं को सिलाई मशीन भेंट करते हुए

आपको कार्य कराने में किन कठिनाइयों का समना करना पड़ता है और सरकार से क्या अपेक्षा रखती हैं?
व्यक्तिगत रूप से तो कोई कठिनाई नहीं आती मगर धन संबंधी कठिनाई अवश्य होती है। पंचायतों में जो धनराशि 14वित्त व राज्य वित्त से विकास के लिए दी जाती है, वह वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार दी जाती है जबकि सन 2011 से अब तक आबादी का स्तर काफी बढ़ा है, जिस कारण विकास कार्यों के लिए दी जाने वाली धनराशि काफी कम है जबकि आवश्यकता अधिक है। सरकार को चाहिए कि ग्राम पंचायतों की आवश्यकता/कार्ययोजनानुसार उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि विकास में कोई बाधा न रहे और कम समय में अधिक विकास हो सके। लेकिन इस सबके बावजूद खुशी की बात यह है कि हमें जनपद के सरकारी उच्‍चअधिकारियों का मार्गदर्शन, प्रेरणारूपी सहयोग समय-समय पर मिलता रहता है।

भविष्य के लिए आपकी क्या योजना है?
ळम भविष्य में अपनी ग्राम पंचायत में सुलभ शौचालय व मूत्रालय, मोबाईल टाॅयलेट, पानी की टंकी व पेयजल के लिए चालित टंकी, मच्छर-मक्खियों के लिए फाग मशीन, श्मशान घाट, बारातघर, चैड़े बड़े संपर्क मार्ग, पुस्तकालय, विशाल वृक्षारोपण और ग्राम पंचायत की अपनी आय बढ़ाने जैसे कार्यों को किया जाएगा।

कुछ हमारे पाठकों या पंचायत के लोगों से कहना चाहेंगी?
बस यही कि हम अपना कर्तव्‍य ठीक से निभाते रहें, स्‍वच्‍छ रहें, स्‍वस्‍थ रहें, शिक्षा पर जोर दें, महिलाओं का सम्‍मान करें, सब अच्‍छा ही होने वाला है।


प्राथमिक विद्यालय और विद्यालय को प्रधान द्वारा प्रदत्त फर्नीचर

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