अब नगर सा लगता है ग्राम तातारपुर लालू

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनपद बिजनौर की तहसील नजीबाबाद में स्थित ग्राम तातारपुर लालू उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े गांवों में से एक है। इस गांव को कभी भी ग्राम पंचायत से नगर पंचायत किया जा सकता है जबकि यह गांव आज भी किसी नगर पंचायत से कम नजर नहीं आता है। पक्के मकान और पक्के रास्ते सहित बड़ा सा बाजार देखकर कोई अनजान आदमी एकाएक विश्वास ही नहीं कर सकता कि तातारपुर लालू कोई गांव है। रेलवे स्टेशन नजीबाबाद भी सही मायनों में इसी गांव का हिस्सा है। यहां स्थित भारत पैट्रोलियम, इंडियन आॅयल कंपनी और हिंदुस्तान पैट्रोलियम के बड़े-बड़े डिपो इस गांव के महत्व को बढ़ा देते हैं। यहां सभी जातियों और धर्मों के लोग शांतिपूर्वक निवास करते हैं और एक दूसरे के दुख-सुख में काम आते हैं। वर्तमान योजना में इस गांव की मुखिया श्रीमती मीनाक्षी त्यागी हैं जो एमए और बीएड हैं जबकि उनकी सेक्रेटरी कु. गोसिया अंसारी ने आॅर्गेनिक कैमिस्ट्री विषय से एमएससी किया है। मीनाक्षी त्यागी एक संभ्रांत परिवार से तआल्लुक रखती हैं। उनके श्वसुर महेन्द्र ‘अश्क’ की गिनती देश के नामचीन शायरों में होती है। यहां प्रस्तुत है मीनाक्षी त्यागी से की गई बातचीत के मुख्य अंश-

आप अपने गांव के बारे में कुछ बताइए।
हमारा गांव वास्तव में गांव कम बल्कि नगर अधिक नजर आने लगा है। यहां एक दो मोहल्लों को यदि छोड़ दिया जाए तो सभी सड़के आरसीसी की हो गई हैं। पूरी तरह से ओडीएफमुक्त हो चुका है। शिक्षा का स्तर काफी ऊँचा है, अधिकतर लोग सरकारी नौकरियों में हैं या फिर अपना कारोबार करते हैं। आपसी सौहार्द बना हुआ है। किसी भी जाती या धर्म के लोग मिलजुलकर रहते हैं। साक्षरता की दर की बात करें तो यहां लगभग सभी लोग साक्षर हैं।

शिक्षा के लिए क्या व्यवस्था है?
सरकारी स्तर पर बात करें तो यहां 6 आंगनबाड़ी केंद्र है। एक प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। निजि स्तर पर आठ-दस जूनियर हाईस्कूल हैं। बराबर में ही एक इंटर कालेज और एक डिग्री काॅलेज है। नगर नजीबाबाद एकदम सटा होने के कारण काफी छात्र नगरीय विद्यालयों में भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते हैं।


ग्राम प्रधान मीनाक्षी त्यागी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करती हुई,
सीडीओ इन्द्रमणि त्रिपाठी को बुके देकर सम्मानित करती हुई

सरकारी योजनाएं क्या-क्या हैं और उनका लाभ गांव वालों को मिल पा रहा है कि नहीं?
सरकार सस्ता गल्ला देती है जिसके लिए हमारे यहां दो राशन डीलर हैं। वृद्धा पेंशन योजना, विकलांग पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना आदि का लाभ भी गांव में पात्रों को मिल रहा है। छात्रों को छात्रवृत्ति और मिड डे मील भी ठीक प्रकार चल रहा है। सरकारी टीकाकरण योजनाएं भी चल रही हैं। आशाएं अपना काम निष्ठा के साथ कर रही हैं। हमारा प्रयास रहता है कि हमारे गांव में कोई भी पात्र सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए। पंचायत सेक्रेटरी कु. गोसिया अंसारी भी बहुत जागरूक हैं और बड़ा गांव होने के कारण हमारे उच्चाधिकारियों का भी भरपूर मार्गदर्शन हमें मिलता रहता है।

पेयजल और गंदा पानी निकासी की व्यवस्था कैसी है?
पेयजल के लिए सड़कों पर जगह-जगह सरकारी नल लगे हुए हैं। लगभग सभी परिवारों में निजि सबमर्सेबिल हैं। फिर भी हमारा प्रयास है कि पेयजल के लिए एक पानी की टंकी स्थापित कराई जाए ताकि पेयजल की किसी भी तरह की समस्या से निपटा जा सके। रही बात गंदे पानी की निकासी की तो उसके लिए पक्की नाली हैं, नाले हैं जिनकी समय-समय पर सफाई चलती रहती है।

आपने अपने अब तक के कार्यकाल में क्या कार्य कराए हैं?
हमारा लक्ष्य समग्र विकास था जिस पर हम चल रहे हैं। अब तक हमने अपने गांव में लगभग 90 प्रतिशत पक्की सड़कों के लक्ष्य को पा लिया है, कार्यकाल पूर्ण होते-होते 100 प्रतिशत सड़कें पक्की हो जाएंगी। गांव का ओडीएफमुक्त होना भी हमारी बड़ी उपलब्धि है। सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाए तो यहां स्वच्छता के लिए ठोस व तरल अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के लिए संयंत्र लग चुका है। आने वाले समय में हमारे गांव में आपको कूड़े के नाम पर एक तिनका भी नजर नहीं आने वाला है। एक और बात है जिसे हम अपनी उपलब्धि कह सकते हैं और वह है हमारे आग्रह पर हमारे गांव का एक हिस्सा जिसे धनौरा नाम से जाना जाता है, उसे इंडियन आॅयल काॅरपोरेशन ने गोद ले लिया है। इस क्षेत्र की हर गली में पथ प्रकाश के लिए सोलर लाईटें, तीन पेयजल यूनिट लग चुकी हैं। प्राथमिक विद्यालय में आरओ, फर्नीचर तथा पंखे भी आईओसीएल ने लगा दिए हैं।

ग्राम प्रधान पद पर रहते हुए कुछ तनाव भी रहते होंगे। ऐसे में परिवार की क्या भूमिका रहती है?
हमारा परिवार काफी बड़ा है जिसका लाभ भरपूर सहयोग के रूप में हमें मिलता है। प्रगतिवादी और समाजवादी सोच होने के कारण तनाव तो हम लोगों से काफी दूर रहते हैं। ईमानदारी से काम करने और स्वयं भी उसका निरीक्षण करने के कारण शिकायतों का अवसर भी हम किसी को नहीं देते हैं। मेरे पति समाजसेवी हैं, उनका अनुभव मेरे बहुत काम आता है।

आपकी भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
साप्ताहिक हाट की कमी खलती है जिसे शीघ्र ही पूरा करने की योजना है। जो लोग गरीब हैं उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रस्ताव भेज दिया गया है। जो सड़के अभी रह गई हैं उन्हें पूरा कराना हमारी प्राथमिकता है। एक एएनम सेंटर जिसे अस्पताल भी कह सकते हैं, कम्यूनिटि हाॅल, पेयजल के लिए एक पानी की टंकी तथा पुस्तकालय आदि को शीघ्र ही पूरा करने की योजना है।


ग्राम प्रधान ओडीएफमुक्ति के लिए विशेष सहयोगी को बुके देकर सम्मानित करती हुई एवं
वृक्षारोपण करती ग्राम प्रधान मीनाक्षी त्यागी एवं पंचायत सेक्रेटरी गोसिया अंसारी

आपके पास अपने गांव की आय बढ़ाने की कोई योजना है?
ठोस व तरल अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों को विक्रय कर आमदनी बढाने की योजना है। साप्ताहिक हाट के माध्यम से भी आमदनी बढ़ाने की योजना है। तालाबों का सौंदर्यकरण कर किसी एक तालाब को तरणताल का रूप देकर भी आमदनी बढाने की योजना है।

महिला सशक्तिकरण के लिए कोई योजना?
हाॅ, सरकारी योजनाएं तो हैं ही इसके अलावा हम लोग जबतब महिलाओं और लड़कियों से मिलते हैं। यथायोग्य उनकी मदद के लिए खड़े रहते हैं। महिलाओं के लिए समह स्थापित किए गए हैं, जिन्हें अभी रेजगार नहीं मिला है उनके लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न किए जा रहे हैं। हमारा एसएलडब्ल्यूएम प्रोजेक्ट हमारी इस योजना को पूर्ण करता नजर आ रहा है।

कुछ कहेंगी हमारे पाठकों से या अपने गांव के लोगों से?
बस यही कि महिलाओं का सम्मान करें, अपने गांव को स्वच्छ रखें और एक दूसरे के काम आते रहें तभी समृद्ध समाज हम बना पाएंगे। समाज को एकसूत्र में पिरोए रखने के लिए हमारा प्रयास है कि हम युवाओं, महिलाओं और वृद्धों के लिए समिति बनाकर समरसता का भाव उत्पन्न करना है।


इज्‍जतघर

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