पीली सलवार / डा. वीरेंद्र पुष्पक

अब वो बिल्कुल नंगी थी। लोगों को गालियां दे रही थी जो भी हाथ आता उठा उठा कर मारने लगी। अब वो रौद्र रूप में थी। भीड़ में हवस के भूखे भेड़िये पास से हटकर दूर जाकर छिप छिप कर उस लड़की के अंगों को ताक रहे थे। मैं और मसहूर साहब दोनो उठकर आये। […]