भ्रष्टाचारी, सरकार की छवि का हत्यारा-परियोजना निदेशक

सरकार का रामराज का दावा झूठा निकला, भ्रष्‍ट अधिकारी चला रहे हैं सरकार,

ये सिस्टम का नंगा नाच नहीं है तो और क्या है. पहली नज़र में दोषी पाये गये परियोजना निदेशक के ऊपर कार्रवाई करना तो दूर उसे सीडीओ का चार्ज भी दे दिया जाता है और भ्रष्टाचारी परियोजना निदेशक मजलूमों के आंसुओं पर कहकहे लगाता है. करोड़ों का वारा न्यारा करता है. योगी की सरकार में नैतिकता के साबुन से धुले चंद भाजपाई उसको बचा ले जाते हैं. मसला आजमगढ़ के डीआरडीए का है. जिसका पीडी (परियोजना निदेशक ) दुर्गा दत्त शुक्ला है. पहले पहचानिये इस तस्वीर को और इसकी कुटिल मुस्कान को. यह आजमगढ़ का परियोजना निदेशक है. था है और रहेगा. क्योंकि एकात्म मानववाद के प्रणेता पं दीन दयाल उपाध्याय के आदर्शों की पार्टी अब सत्ता में है तो जरूर लेकिन दीन दयाल के आदर्श बस उनकी जयंती पर दिये जाने वाले भाषणों तक सिमट कर रह गये हैं. और जिस आखिरी व्यक्ति के दुखों को दूर करने के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, उसी आखिरी व्यक्ति के अरमानों का हत्यारा भाजपा के नेताओं द्वारा पोषित और संरक्षित किया जा रहा है. शर्मनाक लेकिन बिल्कुल सच. उत्तर प्रदेश सरकार की विकास संबंधी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है. दरअसल वह पीडी दुर्गादत्त शुक्ला सीडीओ की जांच में भ्रष्टाचार का दोषी है. चार्जशीटेड है. भ्रष्टाचारी, ब्लैकमेलर, गोलबंद, सरकार की छवि का हत्यारा और अपराधिक प्रवृत्ति का है. देश के प्रधानमंत्री के नाम पर चली और योगीराज की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ को लेकर इस अधिकारी ने अपने अधिकारों का इस कदर बेजा इस्तेमाल किया कि माफिया और अपराधी भी शरमा जाएं. भयादोहन, घूसखोरी और शासकीय कार्य में शिथिलता बरतने वाला यह अधिकारी, दरअसल मुख्य विकास अधिकारी की जांच में न केवल दोषी पाया गया है, बल्कि इसी आरोप में सजा के तौर पर शासन द्वारा मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया. बावजूद दबंगई इतनी कि आजमगढ़ छोड़ने का नाम ही नहीं लिया. और योगीराज की व्यवस्था पर कुंडली मार कर बैठ गया है. हद यह कि जिला प्रशासन भी इसके आगे घिघियाते और मिमियाते नज़र आया. भाजपाई सत्ता में अपने रसूख का इस्तेमाल कर यह भ्रष्ट अधिकारी अपना स्थानांतरण रुकवाने में कामयाब हो गया.

“न चोरी न भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार’ नारे की निर्मम हत्या करने वाला पीडी दुर्गा दत्त शुक्ला योगी सरकार के कायदे और इकबाल को अपने जूते की नोक पर रखता है. अंगद के पैर की तरह एक बार आजमगढ़ में पैर क्या जमा लिया, स्थानीय दलालों और भ्रष्टाचारियों के माध्यम से पुन:वापसी की बिसात बिछा गया. और स्थानीय भाजपा नेताओं को सीढी़ बनाकर शासन से अपने हक़ में फैसला करवाने में कामयाब रहा. अब ऐसे में योगीराज के ‘भ्रष्टाचार मुक्त सरकार’ दावे पर एक बार फिर सवाल उठ खडा़ हुआ है. और जवाब भ्रष्टाचार के शहरी जंगलों में गुम.

भ्रष्टाचारी, ब्लैकमेलर, गोलबंद, सरकार की छवि का हत्यारा, चार्जशीटेड, स्थानांतरित और अपराधिक प्रवृत्ति के मनबढ़ दुर्गादत्त शुक्ला की दरअसल यही असली पहचान और विशेषता है. वंचितों, असहायों के हक़ को मारकर लगातार मोटाते इस शख्स ने जनपद से रिलीव होने से पहले रूकने की आखिरी कोशिश में जो अंतिम चाल चली वो सटीक साबित हुई. और वो थी स्थानीय भाजपा नेताओं को बांटने की. वो जानता था कि एकजुट भाजपाई उसकी स्वार्थ सिद्धि के आड़े आ सकते हैं. सरकारी धन की मलाई खाने को बेक़रार एक खेमा पीडी को बचाने में लखनऊ दरबार का चक्कर लगाने लगा जबकि आजमगढ़ भाजपा का एक खेमा इसकी शिकायत को अंजाम तक पहुंचाया. और पीडी को मुख्यालय (ग्राम्य विकास आयुक्त) अटैच कर दिया. लेकिन लोक पर तंत्र भारी पड़ता है. और तंत्र जीत गया. लोक हार गया. शुक्ला आज़मगढ़ के अपने पद पर बना रह गया. हद तो यहां तक रही कि इस कदाचारी को बचाने और रोकने के लिए स्थानीय भाजपा नेताओं ने अपनी सिफारशी लेटर पैड तक लगा दिए. एक भ्रष्ट अधिकारी से इतना प्रेम एवं अपनेपन के पीछे का मकसद चाहे जो हो लेकिन भाजपाईय़ों की इस लड़ाई से भाजपा और योगीराज का इकबाल जरूर तार तार होता नज़र आ रहा है. कितनी बेशर्मी है कि जिस सीडीओ की जांच में यह पीडी प्रधानमंत्री आवास योजना में धन उगाही, भयादोहन और कदाचरण का दोषी पाया जाता है, और इसकी रिपोर्ट प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सहित आयुक्त को भेजी जाती है, उसी सीडीओ के स्थानांतरण के बाद आजमगढ़ का जिला प्रशासन इसे पीडी के साथ सीडीओ भी बना देता है. इस प्रकरण में आज़मगढ़ के जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी की भूमिका भी संदिग्ध है. क्या जिलाधिकारी को इतना भी नहीं पता कि जिस सीडी पदनाम ने आरोपी की जांच करक उसे दोषी ठहराया है, उसी पद पर आरोपी को बिठा दिया जाये. नाम ना छापने की शर्त पर कुछेक सरकारी कर्मी कहते हैं कि डीएम साहब बहुत ऊंची चीज हैं. उनको अपना काम और लाभ दोनों की अच्छी समझ है. इस अंधेरे निजाम से और क्या हासिल होगा. मतलब सीडीओ और पीडी दोनों के हस्ताक्षर एक ही भ्रष्ट व्यक्ति करता है. और करोड़ों की सांसद और विधायक निधि का वारा न्यारा कर देता है. मज़ेदार बात ये भी है कि सीडीओ का चार्ज लेते ही यह उन निधियों को भी निपटा देता है, जिसे पिछले सीडीओ ने करने से इन्कार कर दिया था. दरअसल यही वह समय था जब इस अधिकारी ने चंद सत्ताधारी लोगों को उपकृत करके अपना बना लिया. फिर पं. दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांत कहां तक संघर्ष करते. भाजपा के चंद स्थानीय नेताओं ने समाज के अंत्योदय के हितों से समझौता कर डाला. और भ्रष्ट पीडी कुटिल मुस्कान के साथ पॉवर, पैसा साधता रहा. अगर योगीराज का चरित्र और स्थानीय भाजपा नेताओं का स्खलन यही है तो पं. दीनदयाल जी ! इस धरती पर दुबारा आने के लिए आप को सौ बार सोचना पड़ेगा. क्यों कि यह वह भाजपा नहीं है, जिसे आप बनाना चाहते थे. यह आज की भाजपा है. जहां सब कुछ पॉलिटिकल और इकनॉमिकल माइलेज के लिए होता है. नहीं तो अगर आप के सिद्धांतो से दीक्षित नेता होते तो उनके सामने जनता और उसका दुख होता नाकि जनता का खून चूसने वाला अधिकारी के बचाव करने की मजबूरी. बहुत अधिकारी आएंगे और जाएंगे लेकिन नौकरशाही के प्रेम प्रसंग में बेचारी जनता के हितों का समझौता करना बस निंदनीय है. अक्षम्य है. इसकी जांच भी होनी चाहिए कि कैसे नौकरशाही का एक अदना सा पीडी एक जिले के संगठन में दो फाड़ कराने में सफल हो जाता है.

‘न चोरी न भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार’ नारे की निर्मम हत्या करने वाले इस पीडी दुर्गा दत्त शुक्ला के बचाव में पैरवी कर चंद भाजपाईयों ने योगी सरकार के कायदे कानून और इकबाल को तार तार कर दिया है. ऐसा पीडी जो व्यवस्था को जूते की नोक पर रखता है, उसके बचाव में दिखते भाजपाई कम शर्मनाक नहीं हैं.

31मई 2018को ग्राम्य विकास आयुक्त (मुख्यालय) लखनऊ स्थानांतरण के बावजूद योगीराज में एक भ्रष्ट अधिकारी का पांव भी आजमगढ़ से टस से मस ना हो सका. क्या ये सरकार की असफलता है या फिर स्थानीय लोभी भाजपाई नेताओं का दबाव. या फिर ये नौकरशाही जड़ों में लगी दीमक से उपजा अभयदान. लेकिन जब तक यह भ्रष्टाचारी आज़मगढ़ में परियोजना निदेशक के पद पर बैठा है, गरीब बेसहारा मजलूम के आंसुओं से भाजपा सरकार की नींव में नमी बढ़ती रहेगी.

अब सोचना होगा कि सरकार कौन चला रहा है. भ्रष्‍ट अधिकारी या राम राज का दंभ भरने वाले नेता…………… इस सरकार से एक चोर नहीं हटता तो बडे भ्रष्‍टाचारियों
को क्‍या खाक हटा पाएंगे……देखें सुबूत

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