आजमगढ़ में उठी केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग

सेवा में,
मा०प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार,नई दिल्ली।
द्वारा-जिलाधिकारी,आजमगढ़।
विषय: मंडल मुख्यालय आजमगढ़(उत्तर प्रदेश) में ‘राहुल सांकृत्यायन केन्द्रीय विश्वविद्यालय’ की स्थापना करने विषयक मांगपत्र।

प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र

महोदय,
सादर अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी अंचल आजमगढ़ का, देश के साहित्य, कला, संस्कृति और समाज निर्माण में पुरातन समय से लगायत आधुनिक युग तक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पौराणिक मान्यताओं और आस्थाओं के अनुसार माता अनुसूईया के तीनों पुत्रों महर्षि दुर्वासा, दत्तात्रेय और चंद्रमा का आश्रम इसी जनपद में है। संसार का पहला लौकिक काव्य (क्रौंच वध से उपजी करूणा के परिणाम स्वरूप) इस जनपद के तमसा(सदानीरा नारायणी) के तट पर रचा गया। तो आधुनिक हिंदी का प्रथम महाकाव्य ‘प्रियप्रवास’ अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने इसी धरती पर (रचनाकाल 1909-1913) रचा था, जिसने समूचे साहित्य के भाषिक चरित्र को परिभाषित किया। विरह के गीत इस धरती पर आज से लगभग ढाई सौ साल पहले गाये गयें हैं। आजमगढ़ गजेटियर के अनुसार रामायण काल में भी अयोध्या राजवंश के चार गुप्त द्वारों में से एक गुप्त द्वार जनपद के महराजगंज स्थित कालभैरल के सिद्ध स्थल पर खुलता था। अनेक पौराणिक और प्रागैतिहासिक भग्नावषेश इस धरती के ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं। जिसे अत्यन्त अनुसंधान और खोज की जरूरत है। इस्लामिक शिक्षा के क्षेत्र में भी अल्लामा शिबली नोमानी से लेकर अतीत में सूफी काव्यधारा के अनेक कवि हुए हैं। जिसमें प्रेमाख्यानों के रचयिता नूर मोहम्मद प्रसिद्ध हैं। तो संत कवियों में गोविंद साहब, भीखा साहब, पल्टू साहब सरीखे विद्वानों ने इस धरती को अपने ज्ञान से उर्वर किया है।
आधुनिक साहित्य में यहां के महापंडित राहुल सांकृत्यायन, हरिऔध, गुरूभक्त सिंह भक्त, आचार्य चंद्रबली पांडेय, पं०लक्ष्मीनारायण मिश्र आदि अनेक महान साहित्यकारों और कलमकारों ने देश और दुनिया को रौशनी दी है। संगीत, कला और सिनेमा के क्षेत्र में हरिहरपुर घराने और कैफी आजमी तथा शबाना. आजमी का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। बुनकरी और ब्लैक पाटरी की यह जमीन अंतर्राष्ट्रीय महत्व की है। स्वाधीनता संग्राम में यह धरती हमेशा बागी रही है। अनेक बार जेल के फाटक को तोड़ क्रांतिकारियों को छुडा ले जाने का पौरूष इस धरती में रहा है।
महोदय,
अन्याय के विरोध में और बग़ावत के लिए जानी गयी इस धरती का इतिहास जितना समृद्ध है। वर्तमान उतना ही दारूण है। गरीबी और असमानता से लड़ने में यहां की जवानी परदेश की ओर रूख करती है। यहाँ शिक्षा और संसाधन की विकट समस्या है। जिसके कारण यहाँ की प्रतिभा का पलायन आम बात है।
यहाँ पिछले सत्तर सालों से आबादी, दलों का वोटबैंक बनकर रह गई है। जिसके कारण यहाँ के संसाधन और प्रतिभा का उपयोग यहां के विकास में नहीं हो सका है। 65 लाख से ऊपर के मानव संसाधन और प्रतिभा की अपार संभावना यहाँ पर है, लेकिन उद्योग और शैक्षिक संस्थानों के अभाव के कारण राजनीति का शिकार हो जाना, यहाँ के जनमानस की जैसे नियति बन गयी है। इस सबके मूल में शिक्षा और शैक्षिक संसाधनों का अभाव है। जनपद की सीमा से सटे जौनपुर में स्थित ‘वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय’(राज्यस्तरीय) के ऊपर अत्यधिक कार्याें के दबाव के कारण आजमगढ़ के शैक्षिक प्रबंधन और गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। जबकि जनपद में लगभग 65 लाख की आबादी, 4054 वर्ग किमी का क्षेत्रफल, 22 ब्लाक, 25 थानें, 8 तहसीलें, 2 नगर पालिकायें, 11 नगर पंचायतें, 10 विधानसभा, 2 लोकसभा सीटें हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए निजी व सरकारी लगभग 250 महाविद्यालय हैं, जो संबद्ध पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुप्रबंधन के शिकार हो जाते हैं। जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली के अनुसार 100 महाविद्यालयों पर एक विश्वविद्यालय का मानक निर्धारित है। जनपद में विश्वविद्यालय निर्माण हेतु पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है। इस केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से जनपद की सीमा से सटी आबादी गाजीपुर (लगभग 40 लाख), मऊ (लगभग 28 लाख), अम्बेडकर नगर (लगभग 26 लाख), गोरखपुर (लगभग आंशिक 25 लाख), जौनपुर (लगभग आंशिक 26 लाख) आदि जनपदों की सम्मिलित लगभग 2 करोड़ की आबादी न केवल लाभान्वित होगी बल्कि पूर्वांचल की प्रतिभाओं को तराश कर राष्ट्रीय क्षितिज पर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।
इसी क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की विराट आबादी के लिए राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय तो अनेक हैं, लेकिन केन्द्रीय विश्वविद्यालय की संख्या संभवतः 2 (बीएचयू, इलाहाबाद) हैं। ऐसे में तीसरे केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग न केवल उचित एवं सार्थक है बल्कि बदलते दौर की आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य भी है।
अतः आप महानुभाव से निवेदन है कि यहाँ की करोड़ों प्रतिभाओं और अपार मानव संसाधनों को सही और सार्थक दिशा देने के लिए, तथा शिक्षित एवं बौद्धिक युवा भारत के निर्माण हेतु एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय महापंडित राहुल सांकृत्यायन के नाम पर स्थापित कराने की कृपा करें, जिससे यहाँ की प्रतिभा का न तो पलायन हो, और न ही यहाँ के युवा- युवतियों को शिक्षाध्ययन हेतु सुदूर ही जाना पडे़, बल्कि यहाँ की युवाशक्ति देश और समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर सकें।
सादर,

प्रतिलिपि:-1-मा०प्रकाश जावेड़कर,मंत्री-मानव संसाधन और विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
2-महामहिम राष्ट्रपति,राष्ट्रपति भवन,नई दिल्ली।

(अरविंद कुमार सिंह)

संपादक शार्प रिपोर्टर

होटल नीलकण्ठ कलेक्ट्रेट

आजमगढ़,उत्तर-प्रदेश

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