कट्टा निकाल के : समकालीन समाज के प्रतिबिम्ब/डाॅ.अंजुषा सिंह

समीक्षा – – समकालीन रचनाकारों में अशोक ‘अंजुम’ संवेदनशील, सहज एवं भावप्रवण गजलकार व गीतकार हैं। आपने इस संकलन, में गजलों व गीतों में हास्यव्यंग्य के माध्यम से संवेदना, मानवीय संबंधनों एवं समकालीन मुद्दों को संरक्षित करने का प्रयास किया है। ‘कट्टा निकाल के’ कृति में 13 हास्य-व्यंग्य, ग़ज़लें तथा 33 हास्य-व्यंग्य गीत संकलित है […]

यहां सुहागन तीन माह जीती हैं विधवा की जिंदगी

पति की सलामती के लिए लेती है ऐसा फैसला आजमगढ़.। यह एक ऐसी परंपरा है जिसपर विश्वास करना मुश्किल है लेकिन वर्षों से ऐसा होता आ रहा है। यहां की महिलाएं सुहागन होने के बाद भी तीन माह तक मांग में सिंदूर नहीं भरती और पति के सलामती के लिए अपने इष्ट की पूजा में […]

वह अपने आँसुओं को रोक नहीं सकीं/राहुल सांकृत्यायन

कालजयी: कनैला छोड़ने से पहले अपनी प्रथम परिणीता के देखने का निश्चय कर चुका था। अब वह चारपाई पकड़े थी। देखकर करुणा उभर आना स्वाभाविक था । आखिर मैं ही कारण था जो इस महिला का आधा शताब्दी का जीवन नीरस और दुर्भर हो गया कनैला मेरा पितृग्राम है। मैं ननिहाल (पन्दहा) में पैदा हुआ […]

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