मन की अंधेरी राहों पर

आभार

तुमने जगा दिये हैं छूकर
सोए मन के तार सजन।
तुमसे ही पाया है मेरे
सपनों ने आकार सजन।
हुआ आज सुरभित तुमसे
मेरे मन का संसार सजन।
भूल नहीं सकती जीवन भर
मैं तेरे उपकार सजन।

जब भी दुःख के बादल छाए।
जब भी पाँव मेरे थर्राए।
मन की अंधेरी राहों पर
तुमने दिल के दीये जलाए।
नहीं जानती प्रकट करूँ
कैसे मन के आभार सजन।
भूल नहीं सकती जीवन भर
मैं तेरे उपकार सजन।

दिल की बात जुबां तक आयी।
फिर भी मैं कुछ कह नहीं पायी।
आस मिलन की थी मन में
पर मैं कहने से घबरायी।
पर तुमने सुन ही ली मेरे
मन की करुण पुकार सजन।
भूल नहीं सकती जीवन भर
मैं तेरे उपकार सजन।

आँगन में फैला उजियारा।
उम्मीदों ने पंख पसारा।
जगमग हो गयीं दसों दिशाएं
पाकर प्रियतम प्यार तुम्हारा।
किया तूने मेरी आँखों का
आमंत्रण स्वीकार सजन।
भूल नहीं सकती जीवन भर
मैं तेरे उपकार सजन।

बाबा की चौपाल

बूढ़ा बरगद देख रहा
युग की अंधी चाल।
बरसों से सूनी लगती है
बाबा की चौपाल।

पाँवों की एड़ियाँ फट गईं
बँटवारे में नीम कट गई
कोई खड़ा है मुँह लटकाए
कोई फुलाए गाल।

बाँट दी गई माँ की लोरी
मुन्ने की बँट गई कटोरी
भेंट चढ़ गया बँटवारे की
पूजावाला थाल।

आँगन से रूठा उजियारा
खामोशी ने पाँव पसारा
चहल-पहल अब नहीं रही
सूखी सपनों की डाल।

-आचार्य बलवन्त
ग्राम- जूड़ी , पोस्ट- तेंदू
राबर्टसगंज, सोनभद्र- 231216 (उ.प्र.)
मो. : 09844558064 , 07337810240
Email- balwant.acharya@gmail.com

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