दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये-अभिषेक सिंह नीरज

शहरनामा

इतिहास पढ़िए या वर्तमान को इतिहास होता देखिए। वरना कोई भक्त न जाने कब आने वाले सालों में यह सिद्ध कर दे कि आजादी के बाद आज़मगढ़ में पहले प्रधानमंत्री आ रहे हैं।अब उनसे कौन माथा टकराये और बताये गुलामी के दौरान प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं होता था प्रभु।

प्रधानमंत्री के आगमन की तय तारीक आखिर आ ही गयी।नागरिक को यूँ तो कई लोगों ने साथ चलने को कहा था, पर साथ में वह स्वतंत्रता कहाँ जो अकेले जाने में है। नागरिक देखता है सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं ।जिसमे पूर्वांचल के कई जिलों से रिजर्व गाड़ियों से आये हुये लोग हैं। कहीं बसें खाली हैं तो कहीं ऊपर तक लदे लोग।जिनमे उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके दादा भी हैं तो दूसरी ओर दूर दराज से आई हुई कामकाजी महिलाए भी शामिल हैं।ये मोदी को सुनने का नशा है या कुछ और।ये अन्दर की बात है अंदर के लोग जाने।

कभी रैलियों की शोभा बढ़ाने वाले नये रंगरूट आज लोगों को नियंत्रित कर रहे हैं और व्यवस्था में सहयोग भी। हां ये वही लड़के हैं जो एकेडमिक मेरिट और दौड़ के दम पर सिपाही की ट्रेनिग कर रहे हैं। जिनके लिए अखिलेश किसी फरिश्ते से कम नहीं। पर अब राज्य सरकार के नौकर हैं दिल मे कोई हो पर हुक्म तो सत्ता का ही मानना होगा। नागरिक जैसे-जैसे रैली स्थल से नजदीक पहुंच रहा है उत्साह,जनसमूह, गाड़ियां , होर्डिंग सबकी समान रूप से बढ़ोतरी हो रही है।

करतालपुर बाईपास पर वह क्षतिग्रसित पिकअप वाहन भी दिखा जहां पिछले दिनों दुर्घटना में घायल ड्राइवर को बचाने से महत्वपूर्ण काम पिकअप में भरे मुर्गों को लूटना स्थानीय लोगों ने समझा था।नागरिक मदूरी हवाई पट्टी पहुंच चुका है । जहां कई करोड़ों की लागत से जर्मन हैंगर टेंट तान दिया गया है। जिसकी लंबाई आधा किलोमीटर और चौड़ाई 200 मीटर है । वाटरप्रूफ टेंट जिसकी क्षमता एक लाख लोंगो की बतायी जा रही थी। खचाखच भर चुका है। टेंट में उपस्थित लोंगो से ज्यादा लोग सड़को पर भटक रहे हैं।वीआईपी गेट से अब वीआईपी लोंगो को भी जाने में मुश्किल हो रही है ।

यह देख नागरिक प्रवेश हेतु सामान्य गेट की तरफ जाता है ।जहां गहन तलाशी ली जा रही है । गेट के पास चुनौटी, बीड़ी, माचिस , गुटखा का ढेर लगा है। मानो मोदी जी को साक्षी मानकर आज़मगढ़ ने नशात्याग का संकल्प ले लिया हो । पर अगले ही पल यह भरम टूट जाता है।जैसे ही आगे खड़े लड़के की काली कमीज उतरवा ली जाती है और नागरिक का हेलमेट इस शर्त पर जब्त कर लिया जाता है कि वापस मिलने की गारंटी शून्य है। ये रंगों से कैसी नफरत वहीं कुछ मुश्लिम महिलाएं अपने परंपरागत परिधान में बेखौफ जा रही हैं । शायद उस काले रंग में बगावत नहीं संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसी लिए कोई आपत्ति नहीं प्रशाशन को।
जिस आम नागरिक का हजार रुपये का हेलमेट अपने काले रंग की वजह से दाव पर लगा हो उसे लच्छेदार भाषण ज्यादा देर तक रोक नहीं पायेगा यह तो तय है ।क्योंकि वहां पहले आओ पहले पाओ का सामान्य सिद्धान्त काम करेने वाला है ।

“आज हमारे खातिर बहुत ही गौरवशाली दिन बा, कि तमसा के पावन तट पर स्थित आजमगढ़ जिला में अइले के सौभाग्य मिलल हवे।जिला तमाम ऋषि-मुनि चिंतकों विद्वानों वह साहित्यकारों की जन्मस्थली रहल हवे ।हम ई धरती के साष्टांग प्रणाम करत हई और आप सभी लोगन के पांव लागत हईं।”

ये प्रधानमंत्री के बोल सुन पूर्वांचलवासी गदगद तो हुआ । पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के फायदे गिनाये जा रहे थे। जो किसानों के लिए लाइफलाइन बतायी जा रही है ।
पर किसानों की लाइफ की लाइन एक्सप्रेस्वे तक पहुंचे तो न ।पैदावार से ज्यादा पलायन है साहब ।

योगी जी ने उनको जवाब भी दिया जो बता रहे थे पुरानी सरकार ने इसका शिलान्यास कर दिया है ।
मोदी जी हम जानते हैं आप ने जो चार सालों में किया उसी को क्यों दोहरा गये आप।
तीन तलाक पे चर्चा और हलाला पे प्रकाश मुश्लिम महिलाओं के वोटों में सेंध की रणनीति लगी ,उज्ज्वला, आयुष्मान, उड़ान, बैंक खाते ये सब पुराना हो चला।
हवाई चप्पल वाला हवाई जहाज में चढे अच्छी बात है पर उससे जरूरी है आज़मगढ़ के लिए हवाई चप्पल वाले का बेटा विश्वविद्यायल में पढ़े। फिर वो हवाई जहाज में सफर की व्यवस्था खुदी कर लेगा। तमसा का पावन तट जिसका जिक्र किया आप ने किया कितना पावन रह गया पता करिये। साहित्यकारों चिंतकों की धरती के सभी लोग एक्सप्रेसवे के किनारे मंडी थोड़ी लगाएंगे।
छोड़िए बात लंबी हो जाएगी दशकों से इंतजार है आगे भी रहेगा कैफ़ियत में रोज हजारों प्रतिभाएं को ठूस के आज़मगढ़,दिल्ली भेजता है ।इन्हें रोक पाने का उपाय करते तो बात बनती। मैडिकल कॉलेज में सुधार करते तो बात बनती।जन आकांक्षाओं का जिक्र करते तो बात बनती। शहीद जय किशन को याद करते तो बात बनती।
आप रटा रटाया भाषण सूना गये और आप के सुरक्षाकर्मी दादा की खैनी की डिबिया जब्त कर लिए और नागरिक का हेलमेट कोई खरीद लिया।

तकलीफ तो हुई बहुतों को पर कुछ बेवजह खुश हो रहे हैं।चाय और पान की दुकानों पर कल चर्चा होगी मोदी झुनझुना पकड़ा गये भक्तों को, और जोरदार ठहाका होगा। पर परिवारवाद ,भ्रष्टाचार ,गुंडाराज को पोषित करने वालों तुम ठहाके लगाने के लायक नहीं हो।
आज़मगढ़ को जो चाहिए अभी वो किसी सरकार ने दिया नहीं ।चलो तब तक अपनी अपनी पार्टी की जयकार लगाते हैं । दिल के आरमा आसुओं में बहाते हैं।

print

Post Author:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *