दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये-अभिषेक सिंह नीरज

शहरनामा इतिहास पढ़िए या वर्तमान को इतिहास होता देखिए। वरना कोई भक्त न जाने कब आने वाले सालों में यह सिद्ध कर दे कि आजादी के बाद आज़मगढ़ में पहले प्रधानमंत्री आ रहे हैं।अब उनसे कौन माथा टकराये और बताये गुलामी के दौरान प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं होता था प्रभु। प्रधानमंत्री के आगमन की तय […]

कचरा बनी दिल्ली में टूटती जीवन सांसें – ललित गर्ग –

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान एवं उनके कथन कि “एक स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अपनी सर्वोत्तम श्रद्धांजलि दे सकते हैं।” का क्या हश्र हो रहा है, दिल्ली में स्वच्छता की स्थिति पर दिल्ली हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणी से सहज ही अनुमान लगाया जा […]

कहानियां जब बतकही सी सरल-स्वाभाविक लगें

पुस्तक – ‘आखि़री गेंद‘ की समीक्षा लेखक -श्री राम नगीना मौर्य ब्ंगला में कहानी के लिए ‘गल्प‘ शब्द का प्रयोग किया जाता है। अर्थात साहित्य की वह विधा जिसमें जीवन अपने स्वाभाविक छंद में बहते हुए पाठक का कम समय लेेते हुए उसे रसानुभूति में सराबोर कर सके। काफी दिनों पूर्व मौर्य जी ने अपना […]

‘सरहदें’ तोड़ती हैं कई तरह की सरहदें- राजेन्द्र वर्मा

कवि हमेशा सीमाएँ तोड़ता है, वे चाहें जिस भी प्रकार की हों— राजनीतिक, समाजिक, धार्मिक अथवा आर्थिक। मनुष्य सामाजिक प्राणी है और समाज के बिना उसका काम नहीं चलता, इसलिए वह सामाजिक नियमों में आसानी से बँध जाता है। यहाँ तक तो ठीक, पर जल्द-ही समाज के ठेकेदार उसे कतिपय निर्देश देने लगते हैं कि […]

पीड़ा के स्वर

भारतीय किसान के परिप्रेक्ष्य में नहीं चाहिए राज सिंहासन ना वैभवी स्वर्ण आडम्बर एक कलम और कुछ अक्षर एक बूंद स्याही की दे दो लिखना चाहूँ मैं पीढ़ा के स्वर पीढ़ा जो अपनी नहीं है ओरो के दुःख में पली है संचित कर अश्रु के बादल हल उसका फिर भी कोई न हल एक बूंद […]

संस्मरण : लिखना तो बहाना है/ अवनीश सिंह चौहान

कई बार मैंने अपने पिताजी से आग्रह किया कि पिताजी दादाजी के बारे में कुछ बताएं? सुना है दादाजी धनी-मनी, निर्भीक, बहादुर, उदारमना व्यक्ति थे। जरूरतमन्दों की धन आदि से बड़ी मदद करते थे, घोड़ी पर चलते थे, पढे-लिखे भी थे? परन्तु, पिताजी ने कभी भी मेरे प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। जब कभी भी […]

कंक्रीट के जंगल कुर्बानी मांगते हैं..

वाराणसी में गिरता पत्‍थर मैं कल जब यहाँ था ठीक उसी समय बस में सवारी करते हुए कार चलाते हुए बाइक से घर लौटते हुए मैं वाराणसी में भी था सुबह ऑफिस जाते वक्‍त बेटी ने कहा था पापा शाम आज बर्थडे है मेरा कैक लाना मत भूलना लौटते वक्‍त मैंने कैक को कार की […]

क्यों होता है महिलाओं से छेड़छाड़/ -डाॅ. प्रेमपाल सिंह वाल्यान

स्त्रियों से छेड़छाड़ की घटनाएँ प्राचीन काल से ही घटती रही हैं। लेकिन वर्तमान समय में इनकी बारम्बारता तो बढ़ ही गई है साथ ही इन घटनाओं ने काफी विभित्स रूप ले लिया है। यह प्रकृति का नियम है कि विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होता ही है, परन्तु युवक-युवतियां यदि स्वस्थ मानसिक धरातल पर […]

उत्तर प्रदेशः अमीर अंचल – गरीब अंचल/गुंजेश्वरी प्रसाद

अमीरी और गरीबी की परिभाषाएं बदल चुकी हैं और दिन व दिन बदल रही है, लेकिन गरीबी एक ऐसी बीमारी है जो परिभाषाओं के बदल जाने से नहीं बदल रही है। मोबाइल फोन तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में 75 से 80 परिवारों के पास पहुंच चुका है, लेकिन शौचालय की व्यवस्था 10 – 15 प्रतिशत […]

आकाशवाणी नजीबाबाद से “बिटिया हमारी” का विधिवत शुभारंभ

नजीबाबाद. आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र के साप्ताहिक धारावाहिक “बिटिया हमारी” का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि/ डीएम अटल कुमार राय ने कहा कि बिटिया हमारी.. साप्ताहिक धारावाहिक सकारात्मक सोच के साथ की गई नई पहल है। आकाशवाणी केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बड़ा सामाजिक बदलाव संभव हो […]

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