संस्मरण : लिखना तो बहाना है/ अवनीश सिंह चौहान

कई बार मैंने अपने पिताजी से आग्रह किया कि पिताजी दादाजी के बारे में कुछ बताएं? सुना है दादाजी धनी-मनी, निर्भीक, बहादुर, उदारमना व्यक्ति थे। जरूरतमन्दों की धन आदि से बड़ी मदद करते थे, घोड़ी पर चलते थे, पढे-लिखे भी थे? परन्तु, पिताजी ने कभी भी मेरे प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। जब कभी भी […]

एक कहानी मैं कहूं/डा. वीरेंद्र पुष्पक

मैं एक शादी में जानसठ गया था। शादी मेरी पत्नी की भांजी की लड़की की थी। मेरे साथ मेरा बेटा शोभित और प्रियांशी भी थी। मंडप में थोड़ा पहले पहुँच गए हम लोग। पहुंचने पर दामाद ने दिल से स्वागत किया। लोगो से मुलाकातें हुईं। कुछ देर बाद मैं एक कुर्सी पर बैठ कर अपने […]

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