पीली सलवार / डा. वीरेंद्र पुष्पक

अब वो बिल्कुल नंगी थी। लोगों को गालियां दे रही थी जो भी हाथ आता उठा उठा कर मारने लगी। अब वो रौद्र रूप में थी। भीड़ में हवस के भूखे भेड़िये पास से हटकर दूर जाकर छिप छिप कर उस लड़की के अंगों को ताक रहे थे। मैं और मसहूर साहब दोनो उठकर आये। […]

स्वतंत्रता पुकारती/अमन कुमार

‘‘आज पंद्रह अगस्त है। पंद्रह अगस्त के महत्व को कोई भारतीय भला कैसे भूल सकता है। इस दिन हमारा पुनर्जन्म हुआ था। दासता की बेड़ियाँ कट गई थीं। अब तक हमारी स्वतंत्रता के लिए न जाने कितने ही वीर सपूत बलिवेदी पर हँसते हँसते चढ़ गए थे। हमारी गुलामी की बहुत छोटी वजह थी और […]

अखिल!‘आई हेट यॅू‘/ डाॅ0 अखिलेश चन्द्र

मम्मी  के बार बार मना करने के बावजूद प्रिया ने अपना फेसबुक प्रोफाइल नहीं बदला, मम्मी ने जब मना किया तो चिढ़ते हुए प्रिया बोेली ’’क्या ममाॅ आप भी न , अपनी पुरानी सोच को अपडेट नही करती , ज़माना रोज का रोज अपने को अपडेट कर रहा है और एक आप है कि अब […]

विस्तार सपनों का/ अमन कुमार त्यागी

कभी-कभी परिस्थितियां भयावह हो जाती है। आदमी सोचता कुछ है, करता कुछ है और हो कुछ जाता है। जीवन भर भोजन बनाता है मगर अन्तिम समय में किसी रेतीली दीवार का भरभराकर गिर जाता है। आसमान सी बुलन्दियों को छूने की चाह रखने वाला उस समय असमंजस की स्थिति में होता है जब जमीन उसके […]

सुन्दर प्रेम / के.एस. तूफ़ान

विजय डिग्री काॅलेज में आया तो उसने अपने अंदर बदलाव महसूस किया। इंटर में उसने अपनी कक्षा में ही नहीं बल्कि जिले भर में नाम किया। परिणाम आते ही अखबार वाले उसके घर दौड़ पड़े थे। सबने उसकी फोटो खींची और उसकी आगे की मंजिल पूछी। उसकी डाक्टर बनने की ख्वाहिश सबको पता चल गई। […]

मैमूद/ शैलेश मटियानी

महमूद फिर ज़ोर बाँधने लगा, तो जद्दन ने दायाँ कान ऐंठते हुए, उसका मुँह अपनी ओर घुमा लिया। ठीक थूथने पर थप्पड़ मारती हुई बोली, ”बहुत मुल्ला दोपियाजा की-सी दाढ़ी क्या हिलाता है, स्साले! दूँगी एक कनटाप, तो सब शेखी निकल जाएगी। न पिद्दी, न पिद्दी के शोरबे, साले बहुत साँड बने घूमते हैं। ऐ सुलेमान की अम्मा, अब मेरा मुँह क्या […]

अन्धेर/प्रेमचंद

नागपंचमी आई। साठे के जिन्दादिल नौजवानों ने रंग-बिरंगे जॉँघिये बनवाये। अखाड़े में ढोल की मर्दाना सदायें गूँजने लगीं। आसपास के पहलवान इकट्ठे हुए और अखाड़े पर तम्बोलियों ने अपनी दुकानें सजायीं क्योंकि आज कुश्ती और दोस्ताना मुकाबले का दिन है। औरतों ने गोबर से अपने आँगन लीपे और गाती-बजाती कटोरों में दूध-चावल लिए नाग पूजने […]

एक चिनगारी घर को जला देती है/तोल्सतोय

अनुवाद – प्रेमचंद एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। उसके तीन पुत्र थे, सब युवक और काम करने में चतुर थे। सबसे बड़ा ब्याहा हुआ था, मंझला ब्याहने को था, छोटा क्वांरा था। रहीम की स्त्री और बहू चतुर और सुशील थीं। घर के सभी पराणी अपना-अपना काम […]

कमज़ोर /अन्तोन चेख़व

आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूल्या वसिल्येव्ना का हिसाब चुकता करना चाहता था। “बैठ जाओ यूल्या वसिल्येव्ना।” मैंने उससे कहा, “तुम्हारा हिसाब चुकता कर दिया जाए। हाँ, तो फ़ैसला हुआ था कि तुम्हें महीने के तीस रूबल मिलेंगे, है न?” “जी नहीं, चालीस।” “नहीं, नहीं, तीस में ही बात की थी । तुम हमारे […]

खोल दो / सआदत हसन मन्टो

अमृतसर से स्पेशल ट्रेन दोपहर दो बजे चली और आठ घंटों के बाद मुगलपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। अनेक जख्मी हुए और कुछ इधर-उधर भटक गए। सुबह दस बजे कैंप की ठंडी जमीन पर जब सिराजुद्दीन ने आंखें खोलीं और अपने चारों तरफ मर्दों, औरतों और बच्चों का एक उमड़ता समुद्र देखा […]

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