हिन्दुत्व और विकास का एजेण्डा एक दूसरे के पूरक/- राजनाथ सिंह ‘सूर्य’

योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का ममुख्यमंत्री बनाये जाने पर अनेक बुद्धिजीवियों, कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक दलों और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया ने एक ही प्रश्न उभारा- भारतीय जनता पार्टी क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ सबका विकास के एजेण्डे पर चलेगी अथवा हिन्दुत्व के। विशेषज्ञ और समझदार होने का जिन लोगों ने तमगा पहन रखे […]

सपा को चाहिए लोहिया का दिमाग/ – अरूण कुमार त्रिपाठी

वर्तमान के गड्डे में गिरी समाजवादी पार्टी का भविष्य तभी उज्जवल है, जब उसे बेहद उर्वर मस्तिष्क और उज्ज्वल चरित्र वाला जुझारू नेतृत्व मिले ताकि दूसरे परम्परा को जीवित कर सके। यह नेतृत्व आचार्य नरेन्द्र देव, जयप्रकाश नारायण और डाॅ.राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को नया अर्थ प्रदान करें, आज संदर्भ में उनकी नई व्याख्या […]

गुजरात चुनाव एक बड़ी चुनौती है/ -ललित गर्ग

पांच राज्यों के विधानसभाओं में भारतीय जनता पार्टी की प्रभावी, ऐतिहासिक एवं शानदार जीत के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्य निशाना गुजरात है। यही कारण है कि चुनाव प्रचार खत्म होते ही वे गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह एवं मंदिर के ट्रस्टी केशुभाई पटेल भी […]

एक योगी का मुख्यमंत्री बनना/- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

योगी आदित्यनाथ को उप्र का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है, इस तथ्य ने सबको आश्चर्य में डाल दिया है, जैसा कि वहां के चुनाव-परिणामों ने डाल दिया था लेकिन उप्र के चुनाव-परिणाम और योगी की नियुक्ति में सहज-संबंध का एक अदृश्य तार जुड़ा हुआ है। आप पूछें कि उप्र में भाजपा कैसे इतना चमत्कार दिखा […]

कर्जमाफी ही समस्या का एकमात्र हल नहीं/ -अरविंद जयतिलक

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में ही लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपए तक का फसली ऋण माफ कर विधानसभा चुनाव में किए गए वादे को निभा दिया है। इस निर्णय से तकरीबन 2.15 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे वहीं सरकार के माथे पर 36,359 करोड़ रुपए का बोझ […]

सरकार की प्राथमिकताओं में किसान कहां खड़ा है ?/-पूण्य प्रसून बाजपेयी

देशभर के किसानों पर कर्ज 12,60,000 करोड़ और तीन बरस में उद्योगपतियों को रियायत 17,15,00,000 करोड़ उद्योगों को डायरेक्ट या इनटायरेक्ट टैक्स में अगर कोई माफी सिर्फ 201 से 2016 के दौरान ना दी गई होती तो उसी पैसे से देशभर के किसानो के कर्ज की माफी हो सकती थी। तो क्या वाकई किसान और […]

प्रधानमंत्री जी! ये नरमुंड लिए किसान,कहीं नरमुंड ना बन जाएं ? /-अरविंद कुमार सिंह

सच तो यह है कि जो देश मेकइन इंडिया, स्टार्टअप, स्टैंडअप और उससे भी बढ़कर बुलेट ट्रेन का सपना देख रहा है और उन्ही सुनहरे सपनों के सहारे उसे महाशक्ति बनते हुए दिखाया जा रहा है। उसी देश की पोषक आबादी यानी ‘अन्नदाता’ कर्ज और सूखे की मार से दिनों-दिन आत्महत्या कर रहा है और मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं इन धरतीपुत्रों के लिए ना स्टार्टअप ले पा रही हैं और ना ही स्टैंडअप हो रही हैैं  । बावजूद देश बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है। इस बदलते देश में लोगों की संवेदनाएं और सरकार की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। अगर कुछ नहीं बदल रही है तो, वह है अन्नदाता के जीवन की बदस्तूर बदहाली ।

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सुशासन की कमजोर कड़ी नौकरशाही/अरविंद जयतिलक

सुशासन से तात्पर्य राजनीतिक ईकाई को इस प्रकार शासन-सत्ता संचालित करना होता है कि वह बेहतर परिणाम दे। जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति करे। सुशासन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई भी सरकार सामाजिक व आर्थिक संसाधनों के लिए शक्ति का प्रयोग करती है। अर्थात सुशासन के अंतर्गत यह देखा जाता है कि किसी […]

उत्तर प्रदेश: संघ की राजनीतिक प्रयोगशाला/ पुण्य प्रसून बाजपेयी

स्ंघ, यूपी को सियासी प्रयोगशाला बनाकर उसे मथेगा। इसके संकेत तो अब साफ हैं, क्योंकि यूपी सिर्फ सबसे बड़ा सूबा भर नहीं है, बल्कि ये संघ की ऐसी प्रयोगशाला है, जिसमें तपकर या तो देश की राजनीति बदलेगी या फिर हिन्दुत्व की राजनीति को मान्यता मिलेगी। जिसका इंतजार, हर किसी को करना ही होगा। —————————————————————————————————————————— […]

स्याही फेंकने वाले प्रवक्ता बन रहे हैं और उससे लिखने वाले प्रोपेगेंडा कर रहे हैं /रवीश कुमार

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को पहले कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया गया है. सम्मान समारोह में उन्होंने यह वक्तव्य दिया. …………………………………………………………………………………………………………………………………… एंकर पार्टी प्रवक्ता में ढलने और बदलने के लिए अभिशप्त हैं. वे पत्रकार नहीं हैं, सरकार के सेल्समैन हैं. जब भी जनादेश आता है पत्रकारों को क्यों लगता है कि उनके खिलाफ […]

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